क्या बैलेंस ट्रांसफर फ़ायदे का सौदा है?
अपना होम लोन कम दर वाले दूसरे बैंक में ले जाने से ब्याज में लाखों बच सकते हैं, पर इस बदलाव में खर्च भी है। आप प्रोसेसिंग फ़ीस देते हैं, और कभी-कभी कानूनी व वैल्यूएशन चार्ज भी। यह कैलकुलेटर बचत की तुलना इन फ़ीस से करता है। अपना बकाया बैलेंस, बचे महीने, मौजूदा दर, नई दर और फ़ीस डालें। आपको नई EMI और फ़ीस के बाद बचा ब्याज दिखेगा। यह भी दिखेगा कि बचत को फ़ीस वसूलने में कितने महीने लगते हैं। अगर ब्रेक-ईवन एक-दो साल में आ जाए और आपके 10 या ज़्यादा साल बचे हों, तो ट्रांसफर पर गौर करना ठीक है। पहले अपने मौजूदा बैंक से दर घटाने को कहें, जिसमें कम या कोई खर्च नहीं लगता। नतीजे अनुमान हैं और इनमें दूसरे चार्ज शामिल नहीं हैं।
नई EMI
₹39,390
मौजूदा EMI ₹41,769
फ़ीस के बाद बचा ब्याज
₹4,08,293
ब्रेक-ईवन
9 महीने
40 L
20,000
आम सवाल
- बैलेंस ट्रांसफर कब समझदारी है?
- आमतौर पर तब, जब नई दर कम से कम 0.5% कम हो और आपके 10 या ज़्यादा साल बचे हों। अवधि जितनी लंबी, कम दर उतनी ज़्यादा बचत करती है।
- बैलेंस ट्रांसफर में कितना खर्च आता है?
- बैंक अक्सर लोन का लगभग 0.25% से 1% प्रोसेसिंग फ़ीस लेते हैं। इसके अलावा कानूनी, वैल्यूएशन और स्टांप शुल्क भी हो सकते हैं। कुल रकम फ़ीस वाले बॉक्स में डालें।
- क्या पहले अपने मौजूदा बैंक से कम दर माँग सकता हूँ?
- हाँ, पहले उन्हीं से पूछें। कई बैंक थोड़ी स्विच फ़ीस लेकर कहने पर दर घटा देते हैं, जो बैंक बदलने से सस्ता पड़ता है।
- क्या ट्रांसफर से मेरा लोन दोबारा शुरू हो जाता है?
- नहीं। आप बची हुई अवधि वही रख सकते हैं, जैसा यह कैलकुलेटर मानता है। लंबी अवधि लेने से EMI घटती है पर ब्याज बढ़ता है।